ग़म के भोज तले, ऐ दिल तू क्यों रोता है? वक़्त ने सबके दामन में भरे है कुछ पल हस्सी के, कुछ ग़म के कल को नरम धुप के किरणें लहरायेंगे खुशियों की क्यारी खिल खिलाएगी ज़िन्दगी का यही दस्तूर है थोड़े ग़म है, थोड़ी ख़ुशी! O heart! why do you shed tears, when […]
a través de यह है ज़िन्दगी – This is life! — radhikasreflection

*बोझ तले।
सुंदर भाव।
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